gaytri mantra lekhan sadhana

Discussion in 'Pujas Prayers & Slokas' started by vabzee008, Jun 4, 2013.

  1. vabzee008

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    गायत्री देवी, वह जो पंचमुख़ी है, हमारी पांच इंद्रियों और प्राणों की देवी मानी जाती है.

    hello dear friends,
    i am starting a new thread here,
    gayatri mantra has been a well known mantra,
    all religious people chant this during surya pooja & tulsi poojan as well in the morning of the day,

    to write gayantri mantra daily has tremendous favourable outcomes,
    it has great rewards,
    writing of 2400 gayatri mantra is equal to chanting of shlok 24000 times,
    so i am starting this thread,
    so that we all can do daily mantra writing &
    great lord be happy with our this devotion..

    all gayatri pariwar sadasya do sandhya pooja at 7 to 7.15 pm,
    with gayatri mantra,
    even in sai satcharitra mahatmya of sandhya pooja & gayatri mantra is given in story of "Medha" one of the great devotee of shri sadguru sainath maharaj,, whom sai declared to be his faithful & a "sachcha" bhakat on farewell of medha...

    here i am starting gayatri mantra writing sadhana,,
    it should be written in red colour only....

    II ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् II


    MEANING:
    हे प्रभु; ओ धरती, वायु औ स्वर्ग; मैं उस वरण करने योग्य देवता के तेज का ध्यान करता हूँ, वह मेरी बुद्धि को प्रेरित करे।

    हे प्रभु! आप हमारे जीवन के दाता हैं
    आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले हैं
    आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले हैं
    हे संसार के विधाता
    हमें शक्ति दो कि हम आपकी उज्जवल शक्ति प्राप्त कर सकें
    क्रिपा करके हमारी बुद्धि को सही रास्ता दिखायें

    मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या

    गायत्री मंत्र के पहले नौं शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं

    ॐ = प्रणव
    भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला
    भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला
    स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला
    तत = वह, सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल
    वरेण्यं = सबसे उत्तम
    भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाला
    देवस्य = प्रभु
    धीमहि = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)
    धियो = बुद्धि, यो = जो, नः = हमारी, प्रचोदयात् = हमें शक्ति दें (प्रार्थना)

    इस प्रकार से कहा जा सकता है कि गायत्री मंत्र में तीन पहलूओं क वर्णं है - स्त्रोत, ध्यान और प्रार्थना.

    so all IL sisters please take part in this devotional sadhana &
    make it to be a good success...

    it's a humble request to all IL friends do participate in this sadhana,
    if u cant type in hindi it will do in english as well,
    or u can do copy+paste from my posting ,
    or best would be that u can write it on ur home in a notebook & post here as confirmed of writing sadhna for the day!!!
    it will help & inspire others as well,
    & our united efforts to serve lord will be fulfilled,,
    please repond to my request!!!


    may guru shri sai & Maa gayatri bless all of us...

    sadguru sainath maharaj ki jai!!!
    gayatri mata ki jai!!!
     
    Last edited: Jun 5, 2013
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  2. vabzee008

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    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
     
  3. vabzee008

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    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
     
  4. vabzee008

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    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
     
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  6. tanvi88

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    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
     
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  7. vidyashankari

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    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
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    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
    ii ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ii
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    Can you please post in English, so that i can write or type it here. Also, tell how many times, we should do once in a day.
     
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  9. vabzee008

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    Gayatri Mantra Significance:
    The Gayatri Mantra is considered one of the most powerful mantras and does not align to any specific God. In the Bhagavad Gita, Lord Krishna had proclaimed to Arjuna – “Among all the mantras, I am the Gayatri”. It is a prayer to the Creator of the Universe to bestow happiness and remove all the sufferings and ignorance from the one who recites it.

    Ideal time to recite Gayatri Mantra:
    The ideal time to recite Gayatri mantra is at morning, day and at dusk. Chanting the Gayatri mantra 108 times daily gives the maximum power. however you can chant it as many times as you can with soul devotion.

    for gayatri mantra lekhan sadhana one should write it minimum 11 times a day!!!

    The Gayatri Mantra Lyrics in English
    AUM BHOOR BHUWAH SWAHA,
    TAT SAVITUR VARENYAM
    BHARGO DEVASAYA DHEEMAHI
    DHIYO YO NAHA PRACHODAYAT.


    Gayatri Mantra meaning in English:

    Oh God! Thou art the Giver of Life,
    Remover of pain and sorrow,
    The Bestower of happiness,
    Oh! Creator of the Universe,
    May we receive thy supreme sin-destroying light,
    May Thou guide our intellect in the right direction.

    Gayatri Mantra Medical Significance

    It is scientifically proved that the Gayatri Mantra has immense healing effect of the chanter. All the syllables in the mantra when flawlessly pronounced, creates a sort of vibration in the body and stimulates all the nerve points creating an healing effect. So it is necessary to chant the Gayatri Mantra flawlessly.

     
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  10. vabzee008

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    thank you dear sister vidyashankari for participating,,

    it's a very humble request to bring it to your notice that mantra is to be write in red colour for it's maximum good effect...

    may sai bless us all...
    om sai ram...
     

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